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सूखे आँसू

ख़त्म हुई बातें प्यारा भी न रहा ये सन्नाटा खूबसूरत थी वो तड़प अब है खरोचती ये बेक़रारी दे दी खुशियाँ हो गये  शुरू ये ग़म बह गये सारे रह गयीं ख़ाली ये आँखें कौन सम्भाले सिवाय मेरे अब ये उदासी?

Solitary

“So, heard about the water shortage this year?” She asked like any stand-up comedian would start a joke. “Yyyepp! 30% short. I don’t get these farmers though. If they’ve no rain, let them have water tankers.” She grinned at a booing crowd. “Come on! Wouldn’t Marie Antoinette say that?” Her humor had but one fan. […]

मिल बाँट के …

मिल बाँट के …

आखरी टुकड़ा कॅडबरी का, पानी पूरी की एक प्लेट, वह गर्मी के दिनों में, पानी का आखरी घूँट, मिल के बांटना ही आधा-आधा, करता था उन लम्हों को पूरा| सुनूँ मैं अनचाहा गाना, क्यों कि तुझे वह रिझाये, तुम चलो दोस्तों के साथ, क्यों की दोस्त हैं वो मेरे, मिल के करें समझौता आधा-पौना और […]

यूँ पीठ कर दी

यूँ पीठ कर दी

यूँ पीठ कर दी मैने तुम्हारी तरफ, क्यों पीठ कर दी मैने तुम्हारी तरफ?   जानती हूँ मैं, तुम ना सह पाओग टपटपाते आँसू, ना देख पाओगे तुम थरथराते होंठ, यूँ पीठ कर दी मैने तुम्हारी तरफ…   पूछोगे तुम, हुआ क्या? देंगे हम मुस्कान बनावटी. सह ना पाओगे, दर्द अनछुपा. यूँ पीठ कर दी […]

Conversations in Macro

Conversations in Macro

How do countries talk to each other? How do skin colors communicate? How do religions engage in dialogue? From one holy book to another? Through pigment-speak of some kind? In one’s language or the other’s? Or do they have a translator or two? Country A and B are in talks together with country C as […]